Detailed Notes on hindi poetry

मंगल और अमंगल समझे मस्ती में क्या मतवाला, जिनमें वह छलकाती लाई अधर-सुधा-रस की हाला, आने वाले नए विश्व में तुम भी कुछ करके दिखाना बड़ी प�

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